अब मुकेश अंबानी भारत के लाखो किराना स्टोर से कमाएंगे अरबो


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मुकेश अंबानी, रिलायंस जिओ की सफलता और समृद्धि के पीछे का इन्ही का दिमाग है, और सफलता के सफर को जारी रखने लिए रिलायंस जिओ एक बार फिर तैयार है। एक नए प्रोटोकॉल और दृष्टिकोण साथ रिलायंस जिओ अब इ-कॉमर्स की दुनिया में ‘रिलायंस रिटेल’ के साथ अपनी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ने योजना बनाई है ।

रिलायंस रीटेल क्या है?

यह 2006 से उद्योग में है, लेकिन अब भारत के असंगठित बाजार और डिजिटलाइजेशन के नए उत्साह को देखते हुए अपडेट का समय आ गया है। ये एक ऐसा व्यापार है जिसे बैंक ऑफ अमेरिका द्वारा अगले दो वर्षों में $ 200 बिलियन के बाजार मूल्य तक पहुंचने की भविष्यवाणी की गई है।

रिलायंस रीटेल देश के छोटे और बड़े स्टोर जिन्हे आमतौर पर किराना स्टोर कहा जाता है, पर अपना ध्यान केंद्रित करेगा क्योंकि ये भारतीय रीटेल बाजार के 90 % हिस्से पर काबिज है । और अगर योजना अच्छी तरह से लागू हो गई, फिर तो कोई ताकत नहीं है जो रिलायंस सफलता के चरम पर जाने से रोक सके ।

रिलायंस रीटेल

तो, गेम प्लान क्या है?

  1. यह पुरे देश में फैले हुए अपने नेटवर्क और jio – base की मदद से किराना स्टोर के दुकानदारों को एक डिजटल प्लेटफार्म से जोड़ेगी।
  2. यह दुकानदारों को ऑनलाइन ऑर्डर देने, ऑनलाइन जीएसटी बिल बनाने, अलर्ट के माध्यम से वस्तुसूचि का प्रबंधन करने आदि में मदद करेगा।
  3. यह दुकानदारों को fast delivery जैसी सेवाओं की मदद से अपना स्टॉक प्रबंधन ( stock maintain ) में सहायता करेगी ।
  4. रिलायंस नेटवर्क द्वारा दिए गए डिजिटल सुविधाओं की मदद से ग्राहकों को बेहतर विश्लेषिकी, सूचना और प्रचार के साथ मदद करेंगी । इससे ग्राहक अधिक जागरूक होंगे और साथ ही साथ उन्हें ब्रांड्स के डिस्कोउन्ट्स की सीधी जानकारी होगी।
  5. इन सब के साथ-साथ यह एक नए ऐप के साथ अपने स्वयं के चैटबॉट बनाने के लिए किराना स्टोरों की मदद करेगा।
रिलायंस रीटेल

हालांकि, सभी ने कहा और माना है की, ब्रांड को ऐसे किराना स्टोर को संगठित क्षेत्र में स्थानांतरित करने में समय लगेगा। एक शोध की माने, तो रिलायंस रिटेल के लिए साल 2021 में 5 मिलियन किराना स्टोर के साथ संभावित गठजोड़ का अनुमान लगाता है, जो कि सबसे खराब स्थिति में भी इस व्यापार को $ 6 बिलियन का उत्पादन करेगा।

कंपनी अब अमेज़ॅन और फ्लिपकार्ट जैसी दिग्गज कंपनियों के खिलाफ प्रतिस्पर्धी दुनिया में प्रवेश कर रही है, लेकिन फिर से, इसकी USP की ठोस रणनीतियों के साथ अपने स्वयं के बैकअप की आवाज है, जो अंबानी परिवार और भारतीय अर्थव्यवस्था दोनों के लिए अद्भुत काम कर सकती है। पर ये आसान नहीं होगा और इसमें काफी समय भी लगेगा ।


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Maharshi Kushwaha
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